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    Question ID: 400129Country: India

    Title: एडवांस नमाज अदा करना

    Question: क्या कोई कामगार आदमी एडवांस नमाज अदा कर सकता है जैसे जोहर में असर की नमाज पढ़ना ।

    Answer ID: 400129Posted on: 29-Jan-2021

    Fatwa ID: 486-315/SN=06/1442

     नहीं, हर नमाज़ को उसके वक़्त में ही पढ़ना ज़रूरी है। इस संबन्ध में एक थोड़ा तफ्सीली फतवा भेजा जा रहा है उसे भी पढ़ लें।

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    Title :जमा बैनस्सलातैन (दो नमाज़ो को एक साथ पढ़ना)

     

    Question : दो नमाज़ो को एक वक़्त में पढ़ना यानी ज़ुहर अस्र के साथ और मग़रिब इशा के साथ पढ़ना जाइज़ है? साबित करें।

     

    Fatwa ID: 199-152/SN=06/1442

     

    दो नमाज़ों के एक साथ पढ़ना

     

    दो नमाज़ों को एक साथ पढ़ना मसलन ज़ुहर और अस्र दोनों पढ़ लेना या मग़रिब के वक़्त मग़रिब और इशा दोनों एक साथ पढ़ लेना फुक़हाए अह़नाफ की तहक़ीक़ के अनुसार शरअन जाइज़ नहीं है; हाँ सफर वगैरह की ज़रूरत के मौक़े पर ऐसा किया जा सकता है कि (मिसाल के तौर पर) ज़ुहर की नामज़ इतनी देर से पढ़ी जाए कि उस से फारिग़ होते ही अस्र का वक़्त होजाए, फिर फौरन अस्र की नमाज़ भी पढ़ली जाए, इसको “जमा सूरी” (ज़ाहिरी तौर पर जमा करना) कहते हैं, ज़रूरत के वक़्त शरअन ऐसा करने में कोई हरज नहीं है। हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) और सहाबा-ए-किराम से ऐसा करना बहुत सी रिवायात से साबित है, और जिन हदीसों से बज़ाहिर एक वक़्त में दो नमाज़ों को जमा करने का सूबूत मिलता है, उनका मह़मिल (मुराद) भी यही “जमा सूरी” है। तफसील के लिए एलाउस्सुनन में इस से संबंधित बहस (चर्चा) देख सकते हैं।

    عن نافع، وعبد الله بن واقد، أن مؤذن ابن عمر، قال: الصلاة، قال: سر سر، حتي إذا كان قبل غيوب الشفق نزل فصلى المغرب، ثم انتظر حتى غاب الشفق وصلى العشاء، ثم قال: "إن رسول الله صلى الله عليه وسلم كان إذا عجل به أمر، صنع مثل الذي صنعت، فسار في ذلك اليوم والليلة مسيرة ثلاث"، قال أبو داؤد: رواه ابن جابر، عن نافع، نحو هذا بإسناده . (سنن أبي داؤد : 2/6، رقم: 1212، باب الجمع بين الصلاتين)

    وعن أنس أنه "كان إذا أراد أن يجمع بين الصلاتين في السفر أخر الظهر إلى آخر وقتها وصلاها وصلى العصر في أول وقتها، ويصلي المغرب في آخر وقتها ويصلي العشاء في أول وقتها ويقول: هكذا كان رسول الله – صلى الله عليه وسلم – يجمع بين الصلاتين في السفر". رواه البزار وفيه ابن إسحاق وهو ثقة ولكنه مدلس . (مجمع الزوائد ومنبع الفوائد: 2/160، رقم: 2984)

    Darul Ifta,

    Darul Uloom Deoband, India